रमेश ‘कॅंवल’की दिलकश ग़ज़लों का पिटारा


001 सरस्वती वंदना.docx
002 अन्दर इक तूफ़ान सतह पर ख़ामोशी का पहरा था.docx
003 अंधेरों का मैं पैरहन ओढ़ लूँ.docx
004 अगरचे मुझको समर्पित किसी का यौवन था.docx
005 अपनी ख़ुशियां सभी निसार करूँ.docx
007 अपने अपने कान बंधक रख दो, आंखें फोड़ लो.docx
008 अपनों के दरमियान सलामत नहीं रहे.docx
009 अब कहाँ मधुमास अपने गाँव में.docx
010 अब कोई वहशतो-दहशत के ये मंज़र न लिखे.docx
011 अब तो मैं रोज़ घर में रहता हूँ.docx
012 अब भी मंजू हसीन लगती है.docx
013 अभी तक हैं दर-ए अहसास पर लम्हे गिरां कितने.docx
014 अक्षरों से शब्द बेकल हो गए.docx
015 आइये मेहरबां और पास आइये.docx
016 आईना ये खता नहीं करता .docx
017 आओ तुम आकर बसा दो मेरे ख़्वाबों के खंडर .docx
018आँखेँ, ज़ुल्फ़े, होंठ और गाल देखते रहे .docx
019 आँखों से कुछ छुपा नहीं रहता .docx
020 आँखों से जब दूर हुआ .docx
021 आँखों से इस्कैन किया .docx
022 आँच के पास आ गया कोयला.docx
023 आग- पानी के आस पास रही.docx
024 आगाज़ मुबाइल है अंजाम मुबाइल है.docx
025 आ गया इन्तख़ाब का मौसम.docx
026 आज भर दीजिये ये मन मेरा.docx
027 आज भी मेरा दामन खाली, आज भी दिल वीरान.docx
028 आदमी बुलबुला है पानी का.docx
029 ऑनलाइन ग़म दिखा.docx
030 आपका जो ख़त पढ़ा .docx
031 आपके हुस्न की लताफ़त हूं.docx
032 आपको देखा जो मैंने ख़्वाब में .docx
033 आपको हो नहीं कोई ग़म.docx
034 आप बताएं क्या है सच .docx
035 आप से मेहरबान का वादा .docx
036 आस्थाओं का मुसाफ़िर खो गया .docx
037 आस्मां से छिन गया जब चांद तारों का लिबास.docx
038 इक नशा सा ज़हन पर छाने लगा.docx
039 इक हवेली में बैचैन थे बामो- दर.docx
040 इशारा,तबस्सुम, नज़ाकत जवानी.docx
041 इस दौर के भारत का अंदाज़ अनूठा है.docx
042 ईंट गारे का था हमारा घर .docx
043 ईश्वर अंश भला इंसान .docx
044 उजाले बांटने जो चल पड़े हैं .docx
045 उनसे मिल कर भाव विह्वल हो गए .docx
046 उभरेगा कभी जो है अभी डूबता चेहरा.docx
047 उमीदों की बस्ती सजी, तुम न आये .docx
048 उलझनों की आंच में तपकर पयम्बर1 बन गये .docx
049 उलझनों के गांव में दुश्वारियों का हल भी है.docx
050 उसकी सारी ख़ूबियाँ ख़ुद जलवागर करता रहा.docx
051 उसके तन में बसी हुई ख़ुशबू .docx
052 उसको चिंता रहती है बस अपने मान और शान की.docx
053 उसे शुह्रतों की हवा लगी, तभी चार दिन में बहक गया .docx
054 एक औरत ही आदम की तक़दीर थी.docx
055 एक पल नहीं लगता उनको रूठ जाने में .docx
056 एक सुन्दर ग़ज़ल सुनाओ न.docx
057 ऐ यार मेरे हिज्र के जंगल को जला दे .docx
057 ऐ यार मेरे हिज्र के जंगल को जला दे.docx
058 क्या कशिश थी तेरे बहाने में.docx
059 करुं न गिला.docx
060 क़र्फ़्यु लगा है रात में बाहर न जाइए .docx
061 कर के सुमिरन पकाई है रोटी .docx
062 करता आया अब तक पाप .docx
063 कहीं ऐसा न हो कि ज़िन्दगी साग़र में ढल जाए.docx
064 कहीं वहशतनुमां अंगड़ाइयां हैं.docx
065 काबे से निकल के भी हैं इक काबे के अंदर .docx
066 काली रात का टीका चाँद .docx
067 काविर्शो1 का काफि़ला2 उनकी नवाजि़श3 पर रूका.docx
068 किनारे खड़ा था भला आदमी.docx
069 किसी की आंखों में बेहद हसीन मंज.docx
070 किसी के लिये आशिकी है मुहब्बत .docx
071 कुर्सियाँ हैं कहाँ फैला अख़बार है .docx
072 कोई दरवेश ये कह कर गया है.docx
073 क़ह्क़हों के दिए जलाओ न.docx
074 क़ाफ़ियों के पहरे में शे’रियत बरसती है .docx
075 क़ुरबत की तल्खियों से पिघलने लगी है शाम.docx
076 कैसी बंदिश है कोई भी पसे-मंज़र न लिखे.docx
077 कौन कहता है ये झमेला है.docx
078 कौन चाहेगा तुम्हें आफ़ात में .docx
079 ख़्वाबों के दरीचों से न अब रूप दिखाओ .docx
080 ख़त्म बेटों का फ़ोन आना हुआ.docx
081 ख़ुदा के दर पे मैं अपनी इबादतें रख दूँ.docx
082 ख़ुशनुमा लमहों के पंछी छत बदलते ही रहे.docx
083 खुशियों का दीदार है औरत -.docx
084 खूबसूरत लगा चांद कल.docx
085 खैरियत रुखसत हुई .docx
086 गगन धरती की मैं हलचल रहा हूँ – Copy.docx
087 ग़म के दस्तरख्वान पर ख़ुशियाँ सजा सकता हूँ मैं.docx
088 ग़म छुपाने में वक़्त लगता है.docx
089 ग़म तेरा मुझे अपनों का अहसास दिलाये.docx
090 ग़म बिछड़ने का नयन सहने लगे.docx
091 गमले में तुलसी जैसी उगाई है ज़िन्दगी.docx
092 ग़रीब लोगों की जां का मुआवज़ा क्या है.docx
093 गर्दिश से निकल आया है किस्मत का सितारा -.docx
094 गाँव ने दो गज़ की दूरी मान ली.docx
095 गुज़़रे मौसम का पता सुर्ख़ लबों पर रखना.docx
096 गुलबदन पर निख़ार का मौसम.docx
097 घटा कर वो क़ीमत बताता रहा.docx
098 घर के बाशिंदों की अनबन बढ़ गयी है.docx
099 घर ग़रीबों का महल हो ये कहाँ मुमकिन है.docx
100 घरों में और बाहर देखते हैं.docx
101 चल बात कर.docx
102 चले आओ.docx
103 चाँद हुआ है रिश्तेदार.docx
104 चिराग़ों को है आज आंधी का डर .docx
105 छोड़ कर चल गयीं जहाँ फ़ानी.docx
106 जब उदासी ने मेरे घर का ठिकाना ढूंढ़ा.docx
107 जब कोरोना की सुई भली आ गयी.docx
108 जब ज़ुल्फ़ तेरी मुझ पे बिखरती नज़र आये.docx
109 जब तेरी बंदगी नहीं होती.docx
110 जब फेंके कोई मुझ पे तेरे नाम का पत्थर.docx
111 जब भी मिलता है कोई शख़्स अकेला मुझको.docx
112 जब भी मैं उससे मिलने की लेकर दुआ गया.docx
113 जब समुन्दर में सूरज कहीं सो गया.docx
114 जब से इस दिल को भा गयी मिटटी -.docx
115 जब से वो बाज़ार गया.docx
116 जब से वह हो गई इक छैल छबीले से अलग.docx
117 जल गये यादों के बामो-दर धूप में.docx
118 जलसों में झूठा बोले.docx
120 जामुन की शाख़ पर क भी झूला न डालिए.docx
121 जामो-सुबू1 यूं ही नहीं ठुकराये हुये हैं.docx
122 जिस तरफ़ सब गए.docx
123 जिसे हमने फेंका उठाया भी है.docx
124 जी हुजूरी करो.docx
125 जुनूं की वादियों से दिल को लौटाना भी मुश्किल है.docx
126 जुनू हूं, आशिक़ी हूं.docx
127 जुर्म का इक़रार कर लूँ मुझको हिम्मत हो गयी.docx
128 जुर्म है इश्क़ तो हां इसका खतावार हूं मैं.docx
129 जो अब तक न पाया वो सब चाहिए.docx
130 जो पल गुज़र गए उन्हें मुड़कर न देखिये.docx
131 जो पागल कर दे वो अंगड़ाइयां हैं – Copy.docx
132 जोबन के दरीचो पे कोई परदा नहीं था.docx
133 जो समर्पित थे कल तक बदलने लगे.docx
134 झूमती हर सुबह की खूं में नहाई शाम है.docx
135 ज़ख़्म पर ज़ख़्म वह नया देगा.docx
136 ज़रा ज़रा सी बात पर वो मुझसे बदगुमां रहे.docx
137 ज़रुरियात की फ़ेहरिस्त वह दिखाता है.docx
138 ज़हन की शाख़ पर ख्वाब फलते रहे.docx
139 जि़ंदगी इन दिनों उदास कहॉ.docx
140 ज़िन्दगी नाहक उदासी भर नहीं.docx
141 ज़िन्दगी ये चार दिन की एक दिन भाया उन्हें.docx
142 ज़ुल्फ़ गालों पे बिखरने को ग़ज़ल कहते हैं.docx
143 टूटे हुये तारे का मुकद्दर हूं सद1 अ फ़्सोस2 – Copy.docx
144 ठुकराओगे तो सोच लो पछताओगे बेशक – Copy.docx
145 ठोकर में डाल कर ये ज़माने की दौलतें – Copy.docx
146 डट के पीछे मेरे पड़ा है कोई – Copy.docx
147 डिजिटल करे पढ़ाई ग़म- – Copy.docx
148 डूबने वालों में उसका नाम है – Copy.docx
149 तन की हसरत में अब उबाल नहीं – Copy.docx
150 तन की ख़्वाहिश मन की लगन को सू-ए-हवस1 ले जायेगी – Copy.docx
151 तबलीगी जमाती हैं तो जाहिल नहीं होंगे – Copy.docx
152 तरन्नुम की मलिका से जिसने निबाही – Copy.docx
153 तुझे मैं ख्वाबों का अलबम दिखा नहीं पाया – Copy.docx
154 तुमसे मिलने का इरादा – Copy.docx
155 तुमसे मैं मुझसे आशना तुम हो.docx
156 तुम हमारे न हुए,कोई हमारा न हुआ.docx
157 तुम्हारे लफ़्ज़ों को भावनाओं की पालकी में बिठा रहा हूँ.docx
158 तुम्हारी यादों का सिलसिला हो.docx
159 तुम ही कहो बढ़ जाती है क्यों बरसातों में दिल की जलन.odt
160 तू उधर था, इधर हो गया.docx
161 तेरे ख़त जब भी मेरे नाम आए.docx
162 तेरे बिस्तर पे कोई सोता है.docx
163 तेरे वस्ल की शोख़ चाहत से पहले.docx
164 तेरी यादों के दस्तावेज़ अल्बम से निकल आए.docx
165 थी भीड़, एहतियात का गुलशन कहाँ मिला.docx
166 दरख़्त फूल समर डाली शादमाँ देखूं.docx
167 दर्द का लश्कर उधर तैयार है.docx
168 दर्द की धुन पर ग़ज़ल है.docx
169 दर्द की भाषा पढ़ो.docx
170 दस्ते क़ातिल बेहुनर है आजकल.docx
171 दाल रोटी और दवाई के सिवा क्या चाहिए.docx
172 दिन को दिन लिखना, रात मत लिखना.docx
173 दिन से डर कैसा हसीं रात से जी डरता है.docx
174 दिल का मकान ग़म ने किराये पे ले लिया.docx
175 दिल का मौसम ,तेरी गलियां,दिन सुहाने सोचकर.docx
176 दिल की दुनिया हो गई जे़रो-ज़बर1.docx
177 दिल की बस्ती में लूट पाट न कर.docx
178 दिल बड़ा बेक़रार रहता है.docx
179 दीवारों में दर होता है.docx
180 दुज़दीदा निगाही से नहीं कोई शिकायत.docx
181 दोस्त आओ तो सही.docx
182 ध्वंस का वंध्याकरण अब कीजिए.docx
183 धर्म संसद में शुरू हुईं गालियाँ.docx
184 न कोई लाल-ओ-गौहर देखते हैं.docx
185 नगर, गांव, बस्ती जलाने से बचिए.docx
186 न चुप रह.docx
187 नज़र से आरती तेरी उतारूं.docx
188 न जो मिला वो ख़्वाब है.docx
189 नशे में चूर होना चाहती है.docx
190 ना-कर्दा गुनाहों की सज़ा काट रहे हैं.docx
191 नाम यश डिग्री पता मान गए.docx
192 नाम हूँ मैं , मेरा पता तुम हो.docx
193 निगाहों में बसी है तेरी मूरत.docx
194 नुक्रई1 उजाले पर सुरमई अंधेरा है.docx
195 पत्थरों को आइना दिखला रहा है कोई शख़्स.docx
196 प्रश्न हूं मैं, हल नहीं हूं.docx
197 पलक झुका कर हामी भर.docx
198 पहरे मंदिर पर देखो.docx
199 पहुँच इक मुश्ते-खाकी1 की सितारों के जहां तक है.docx
200 पाँच जी की ही चल रही है हवा-.docx
201 पाँव बुजुर्गो के दाबे.docx
202 पैरों में मेरे फर्ज की जंजीर पड़ी है.docx
203 फ़्लैट पर धूप आती नहीं.docx
204 फ़िक्र मेरी ले के शुहरत पा रहा है.docx
205 फूल की पंखडियों को मसलेंगे.docx
206 फूल को ख़ुशबू , सितारों को चमन हासिल हो.docx
207 फूल ख़ुशबू से समाहित हो गए.docx
208 बड़ी आसान क़िस्तों में चुका है.docx
209 बड़े ही खूबसूरत हैं बड़े प्यारे, मज़े के दिन -.docx
210 बदतर ही हालत किया.docx
211 बदला बदला सा है मेरा दफ़्तर -.docx
212 बरसों बाद ज़मानत पर है आई ग़ज़ल –.docx
213 बल खाती मछलियां हैं, सफ़र चांदनी का है.docx
214 बांहो में समुन्दर के दरिया का सिमट जाना.docx
215 बाग़ में मिली बहार.docx
216 बात दिलबर की दिलकशी की है.docx
217 बारिश में भीगते हुये पास आया चल दिया.docx
218 बिखरी हुई हयात1 से सिमटे लिबास थे.docx
219 बेटियों की बहुत ज़रूरत है.docx
220 बेटी पर सख्ती, बेटों को मस्ती के त्यौहार मिले.docx
221 बे हद मालामाल हुआ.docx
222 बेहुनर को सिखाया हुनर.docx
223 भूल जाओ गया सो गया.docx
224 मजदूरों के लिए कोई लारी न आएगी.docx
225 मदिरा छलकाने आई.docx
226 मये-गुलरंग1 का क़सूर नहीं.docx
227 मुक़द्दर का सूरज घटाओं में था.docx
228 मुजरिमों से मिले रह गए.docx
229 मुझको निहारते रहे सामान की तरह .docx
230 मुझसे मिल के वो क्यों इतना गदगद हुआ.docx
231 मुझसे मिलता है अजनबी की तरह.docx
232 मुझे ज़िन्दगी ने लुभाया बहुत.docx
233 मुद्दतों बाद तेरी याद सुहानी आई.docx
234 मुफ़्त मिली पहचान नहीं हूं.docx
235 मुस्कराउंगा, गुनगुनाउंगा.docx
236 मोहब्बतों के सफ़र में थकान थोड़े है।.docx
237 मेरा हमनवा नहीं है.docx
238 मेरी ग़ज़लों की रानी है जो उसकी बात ही क्या है.docx
239 मेरी पलकों पे तेरे ग़म खज़ाने निकले.docx
240 मेरे घर आई ख़ुशी -.docx
241 मेरे दोस्त पल में ख़फ़ा हो गये.docx
242 मेरे मंसूब होने के क़िस्से.docx
243 मेरे सर की क़सम खाने लगा है .docx
244 मेरे हमसफ़र .docx
245 मेरी आँखों में आ गए आँसू-.docx
246 मेरी सदाओं का सूरज बुझा बुझा सा था.docx
247 मैं अपने होंठों की ताज़गी को तुम्हारे होंटों के नाम लिख दूँ.docx
248 मै शहर मे पत्थर के हूं इक पैकरे-जज़्बात.docx
249 मैं यजमान जबसे बना हूं.docx
250 मैं समुंदर हूँ मुझको नदी चाहिए.docx
251 मौज में आज है जलपरी.docx
252 मौत की दहशत छाई है.docx
253 मौत है नग़मासरा अब ज़िन्दगी ख़ामोश है.docx
254 मौन हो.docx
255 ये न कहिये भला नहीं होता.docx
256 ये सच है कि सर धड़ से मेरा दूर हो गया.docx
257 रंग उसका उड़ गया.docx
258 रंगरलियाँ वो मनाने को तहख़ाने में मिले.docx
259 रंजिशें उभरीं तअल्लुक़ 1 के सभी दरपन चनक कर रह गये.docx
260 रहबरे – क़ौम, रहनुमा तुम हो.docx
261 राज़ जो दिल में है चेहरे पे छुपाते क्यों हो.docx
262 रात का क़िस्सा कहानी आधी रात.docx
263 रात दिन उसको सोचना क्या है .docx
264 रिश्ते रिसते रह जाते हैं.docx
265 रिश्तों को मिस्मार किया.docx
266 रिश्तों में पहले जैसी तमाज़त नहीं रही.docx
267 रेत में कोई धार पानी की .docx
268 रोज़ डूबे हुये सूरज को उगा देती है.docx
269 रोज़ सोते हैं जाग जाते हैं.docx
270 लगता है कुछ अच्छा दिल+.docx
271 लफ़्ज़ बरते गए सलीक़े से.docx
272 लफ्ज़ मैं और तुम मआनी हो.docx
273 लम्स1 की आंधियों से जो डर जायेंगे.docx
274 लमहाते- शाख़े-वक़्त ने क़ादिर बना दिया.docx
275 लिबासे- जि़ंदादिली1 तार तार था कितना.docx
276 वो जो घर था, तुम से ही था वो घर, तुम्हें याद हो कि न याद हो.docx
277 वो रह – रह के अब याद आने लगे हैं.docx
278 वो रूखे -शादाब है और कुछ नहीं.docx
279 वह जो लगता था पयम्बर इक दिन.docx
280 श्याम की टोली हो जा तू.docx
281 शरीके ज़िन्दगी हूँ.docx
282 शहर दर शहर भर गया पानी .docx
283 शह्र से लाज का अपहरण हो गया.docx
284 शाम हुई क़िस्तों में बिखरते सूरज का मंज़र1 उभरा.docx
285 शुक्रिया.docx
286 समुन्दर में बेचैन हैं मछलियाँ.docx
287 सर्द है रात, सुलगती हुई तन्हाई है.docx
288 सवाल आँखों से कर रहा हूँ, जवाब पलकों से दे रही है.docx
289 सहमी सहमी हुई तस्वीर लिये बैठे हैं.docx
290 साजन से मिल आई धूप.docx
291 सामने तुम हो, सामने हम है, बीच में शीशे की दीवार.docx
292 साथ चलने की तमन्ना दिल में है.docx
293 साहिबा को सलाम है साहिब.docx
294 सितारों भरा जग दुलारा गगन-.docx
295 सिर्फ़ अदहन में है उबलती आग -.docx
296 सुनहरी यादों के जंगल में खो गई होगी.docx
297 सुनी है सभी की मगर की है मन की.docx
298 हट उधर चल.docx
299 हम खाक नशीनों को अब आराम नहीं है.docx
300 हर आदमी दुख दर्द में ग़लतां1 नज़र आया.docx
301 हर ऑफिस में एक सा मंज़र.docx
302 हर दम दिल के आंगन मे ली गम ने ही अंगड़ाई.docx
303 हर पल संवरने सजने की फुरसत नहीं रही.docx
304 हर शहर गाँव कसबे पे यूँ मेहरबां हुआ.docx
305 हरी पत्तियों पर फिसलती रही.docx
306 हवा की चिराग़ों से है दोस्ती.docx
307 हुस्न है दिलकश तबाही इश्क़ को मंजूर है.docx
308 हुनर पैरवी का सिखाते हमें.docx
309 हैं अपने सम्बन्ध यथावत.docx
310 है बात जब कि जलती फ़ज़ा1 में कोई चले.docx
311 है मुहब्बत जो तेरे दिल में वही इस दिल में है.docx
312 होंठों पर पहरे हैं.docx

313 हौसलों के नगर में रहे.docx