जनवरी 2, 2020

ज़रा ज़रा सी बात पर वो मुझ से बद-गुमाँ रहे जो रात दिन थे मेहरबाँ वो अब न मेहरबाँ रहे जुदाइयों की लज़्ज़तों की वुसअतें नहीं रहीं वो ख़ुश-ख़याल वस्ल बन के मेरे दरमियाँ रहे पहेलियाँ बुझाओ मत बहाने अब बनाओ मत यहीं कहीं नहीं थे तुम बताओ फिर कहाँ रहे वो मेरे साथ कब…

दिसम्बर 20, 2019

तुझ से मैं मुझ से आश्ना तुम हो मैं हूँ ख़ुशबू मगर हवा तुम हो मैं लिखावट तुम्हारे हाथों की मेरी तक़दीर का लिखा तुम हो तुम अगर सच हो, मैं भी झूट नहीं अक्स मैं, मेरा आइना तुम हो बे-ख़ुदी ने मिरा भरम तोड़ा मैं समझता रहा ख़ुदा तुम हो मैं हूँ मुजरिम, मिरे…