मुहब्बतों का शायर : रमेश 'कँवल'
नाम : रमेश प्रसाद, बि.प्र.से. (से.नि.)
जन्मतिथि : 25 अगस्त, 1953
धर्मपत्नी : श्रीमती मंजूप्रसाद (परिणय 22 जून 1978)
अदबी ख़िदमात :
‘कँवल’ शाहाबादी नाम से पहली ग़ज़ल परवाज़, लुधियाना से अगस्त 1972 में प्रकाशित हुई|
प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह :
- लम्स का सूरज (उर्दू) - 1997 में
- सावन का कँवल (हिंदी) - 1997 में
- शोहरत की धूप (हिंदी) - 2013 में
- रंग-ए-हुनर (उर्दू) - 2016 में
- स्पर्श की चांदनी : काव्य संग्रह (ग़ज़ल नज़्म) - 2019 में
- इतराती बलखाती ग़ज़लें : ग़ज़ल संग्रह - 2024
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Author: Ramesh Kanwal
Author: Ramesh Kanwal
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"रामेश कान्वल का काम भाषाई सीमाओं को पार करता है, भावना और मानवता की एक सार्वभौमिक भाषा बनाता है।"
"एक कुशल कहानीकार जिनकी कथाएँ भारतीय संस्कृति के सार को पकड़ती हैं जबकि वैश्विक रूप से प्रासंगिक रहती हैं।"
"कान्वल की कविता की गहराई और सुंदरता ने मेरी आत्मा को छू लिया है। साहित्य प्रेमियों के लिए अवश्य पढ़ें।"
#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'129 जो अब तक न पाया वो सब चाहिए मुझे ज़िन्दगी का सबब चाहिए ये मत पूछिए हम से कब चाहिए करम आपका रोज़-ओ-शब चाहिए बहारों का मौसम बुलाने लगा मुझे आपका साथ अब चाहिए वफ़ा से हों रोशन दिए आँख के तबस्सुम सजा सुर्ख़ लब चाहिए हुनर नेकियाँ भूल जाने का हो बदी याद रखने का ढब चाहिए तरन्नुम,सलीक़ा,फ़न-ओ-फ़िक्र भी ग़ज़ल में सुख़न बाअदब चाहिए रहूँ साथ तेरे घड़ी दो घड़ी ग़ज़ब है तमन्ना, अज़ब चाहिए बदन में तमाज़त तेरे जिस्म की मेरे होंटों पर तेरे लब चाहिए नहीं दूर तक कोई इन्सां ‘कँवल’ मेरी आरज़ू है कि रब चाहिए प्रकाशित : संदल सुगंध भाग 4 (2017),पृष्ठ 34 ग़ज़ल संग्रह - स्पर्श की चाँदनी पृष्ठ 73 से उद्धृत
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