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होंठों पर पहरे हैं

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

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मुहब्बतों का शायर : रमेश 'कॅंवल'
#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’312
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
होंठों पर पहरे हैं
कुछ ख़्वाब सुनहरे हैं
गूंगों की हिफ़ाज़त में
हाकिम सब बहरे हैं
अफ़वाह की शहजादी
के रंग सुनहरे हैं
क़ातिल की हवेली पर
इंसाफ़ के पहरे हैं
हसनैन हुसैन हसन
इस्लाम के चेहरे हैं
गोविन्द शिवाजी तो
हिंदुत्व पे ठहरे हैं
तारीख़ के पन्नों पर
साजिश के ककहरे हैं
न गवाह 'कँवल' बनना
जल्लाद के पहरे हैं