#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’257
रंग उसका उड़ गया नाग जब सम्मुख दिखा
रह गया मुंह देखता झूठ का था दबदबा
जाने क्या उसने कहा सत्य कोने में मिला
कब दिखा हर शख्स में हो गया आंसू से तर
सच सुने ये हौसला फूल तकिये पर कढा
जान ले कर लाखों की मेरी शुहरत भी गयीठण्ड का मौसम गया जब मेरा ओहदा गया
उनके फ्री के जश्न में बुत को नेताजी के अब
टैक्स - पेयर लुट गया मिल गया है घर भला