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जिस तरफ़ सब गए

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

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मुहब्बतों का शायर : रमेश 'कॅंवल'
#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'122
रा म भज रा म भज
जिस तरफ़ सब गए
हम उधर कब गए
सच नहीं कह सके
ज़िंदा हम तब गए
उसने आवाज़ दी
बाअदब सब गए
दूर करने को जिच
सब मुहज्ज़ब गए सभ्य लोग
इल्मो-फ़न सीखने
लोग मक्तब गए
कैसी महफ़िल थी वो
बेअदब सब गए
अपनी तफ़सीर को भाष्य/मतलब
सारे मज़हब गए
सबके रब थे अलग
जंग में सब गए
दिल के दफ़्तर में हम
था 'कँवल' तब गए
25 जनवरी,2022