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मेरा हमनवा नहीं है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'237
मुसतफ़इलुन फ़ऊलुन
वह हमनवा नहीं हैपर बेवफ़ा नहीं है
दुख में जो हौसला दे ऐसा सगा नहीं है
ग़म से निजात पाए दिल की रज़ा नहीं हैमँझधार में जो छोड़े वह नाख़ुदा नहीं है
ज़ुल्फ़ों से तेरी कालीकोई घटा नहीं हैउस हुस्न में कशिश हैपर दिलरुबा नहीं हैजो एप से निबट लेवह आईना नहीं है