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करुं न गिला

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल' 059
मफ़ा इलतुन
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करुं न गिलाये तू ने कहा
कहीं न छुपाकहीं न गया
मिली न दवान की ही दुआ
नज़र से गिरा
ये किस ने कहा
सिहर गया मैंजो उस ने छुआ
जो खिड़की खुली
तो आई हवा