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ग़रीब लोगों की जां का मुआवज़ा क्या है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'092
ग़रीब लोगों की जां का मुआवज़ा क्या है
मैं मर भी जाऊं तो बच्चों को फ़ायदा क्या है
कोई भी फ़ैसला उसके बिना नहीं होता
ऐ नाख़ुदा तुम्हें मालूम क्या ख़ुदा क्या है
घड़ी को मैंने मिला रखा है घड़ी से तेरी
मैं जानता हूँ तू हर वक़्त चाहता क्या है
तेरे बिछड़ने का दिल को मलाल क्या होता
जो सुख का साथी हो दुःख में निबाहता क्या है
तुम्हारे नाम पे जब दिल मेरा नहीं धड़के
तुम्हीं बताओ मुहब्बत में तब रखा क्या है
ये मेरा जिस्म तो इतवार को भी खटता है
मैं जानता नहीं छुट्टी का फ़लसफ़ा क्या है
लिबास क़ीमती पहने हुए दिसंबर का
‘कँवल’ को जून की मलमल से झांकता क्या है
सृजन : 9 अप्रैल 2013
आकाशवाणी,पटना से 17 नवम्बर 2014 को महफ़िल –ए –सुखन में प्रसारित