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क़र्फ़्यु लगा है रात में बाहर न जाइए

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल' 060
मफ़ऊल फ़ाइलातु मफ़ाईलु फ़ाइलुन
क़र्फ़्यु लगा है रात में बाहर न जाइए
फ़ुटपाथ जिनका घर हो उन्हें क्या बताइये
कोविड हो डेल्टा हो कि हो ओमिक्रोन ये
मेहमाँ बना के इनको न घर पर बुलाइए
दुनिया बहुत भली है बजा पर मेरे हुज़ूर
हरगिज़ न आप इसको कभी आज़माइए
सूरज का सुर्ख़ ख़ून फ़लक पर बिखेर कर
मक़तल ने तीरगी से कहा घर बसाइए
दुनिया बदल न पायेगी कोशिश न ये करें
ख़ुद को बदल के दुनिया को ख़ुशतर बनाइये
ज़ख़्मों पे मल के नून हँसेंगे ये बारहा
मत दोस्तों को घाव कभी भी दिखाइये
अच्छे दिनों की धूम है मथुरा चलें 'कँवल'
काशी में पूजा कर के अयोध्या भी आइए