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हौसलों के नगर में रहे

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’313
हौसलों के नगर में रहे ख़्वाब मेरे सफ़र में रहे मास्क पहने रहे मुंह पे दो अपनी सेहत के डर में रहेराहतें जो नहीं दे सके हॉस्पिटल वे ख़बर में रहेआग शमशान की कब बुझीअश्क ही चश्मे - तर में रहेभाप ली, काढ़ा हमने पियाखौफ़ के हम असर में रहे
हम बना कर रहे दूरियांऔर सबकी नज़र में रहे
फ़ोन पर ख़ैरियत पूछ ली दोस्त सब अपने घर में रहे
हद न दीवारों की पार की क़ैद हम बामो-दर में रहे
कब गए मंदिरों में 'कँवल' ध्यान पूजा अधर में रहे
23 अप्रैल 2021
वीर कुंवर सिंह जयंती
प्रभात ख़बर,पटना 11 जून 2021 के अंक में पृष्ठ 11 पर प्रकाशित