#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’282
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
शह्र दर शह्र भर गया पानी
बारिशों में ठहर गया पानी
कार, बाइक कि बस हो, तैर रहे
मस्तियों के नगर गया पानी
कोई हिकमत हो ज़ीस्त की खातिर
अब तो सर से गुज़र गया पानी
देखकर चाल ढाल दरिया का
हिन्द सागर में डर गया पानी
भूमि पर मुश्किलों से मिलता है
इतना नीचे उतर गया पानी
मुल्क में लीडरान हैं ऐसे
जिनकी आँखों का मर गया पानी
आज इज्ज़तमआब को देखा
कैसे रुख से उतर गया पानी
आज फिर याद वो बहुत आए
आज आँखों में भर गया पानी
सीखिए जल बचाना वर्ना 'कँवल'
ढूंढिएग़ा किधर गया पानी
सृजन : 3 अक्टूबर,2022