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शरीके ज़िन्दगी हूँ

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’281
शरीके – ज़िन्दगी हूँ
मैं मस्ती की नदी हूँ
गुलों की ताज़गी हूँ
मैं शबनम की नमी हूँ
जुनूं हूँ, आशिक़ी हूँ
बशर हूँ , बंदगी हूँ
दिसंबर का हूँ सूरज
मई की चाँदनी हूँ
निहारो रात दिन तुम
मैं इक सूरत भली हूँ
हया सिंगार मेरा
कली की सादगी हूँ
गवाही मुजरिमों की
अदालत में खड़ी हूँ
मुहब्बत का हूँ क़ायल
‘कँवल’ इक आदमी हूँ
प्रकाशित : संदल सुगंध भाग-4 वर्ष 2017 पृष्ठ 35
गोलकोंडा दर्पण अप्रैल 2009 पृष्ठ 8
दिल्ली मीडिया जनवरी 2012 पृष्ठ 63
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