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राज़ जो दिल में है चेहरे पे छुपाते क्यों हो

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’261
फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलून /फ़इलून
राज़ जो दिल में है,चेहरे पे छुपाते क्यों हो
मुझसे जब हाथ मिलाते हो,दबाते क्यों हो
अपने सीने पे सजा लेते हो क्यों याद मेरी
तुम मुझे बांहों की तावीज़ बनाते क्यों हो
दिल दुखाते हो मेरा, तोड़ते रहते हो मुझे
रूठ जाता हूँ तो फिर मुझको मनाते क्यों हो
मुस्कुराते हो मुसलसल मुझे ग़म दे के मगर
मुझको तोहफ़े की तरह दिल में सजाते क्यों हो
जब नहीं होता है महफ़िल में ‘कँवल’ जाने-ग़ज़ल
तुम सरे-बज़्म यूँ अशआर सुनाते क्यों हो