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रात दिन उसको सोचना क्या है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’261
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ैलुन
रात दिन उसको सोचना क्या है
यादे-माज़ी में अब रखा क्या है
जो न अपना हुआ भला क्या है
उसके इस जुर्म की सज़ा क्या है
आप अब तक समझ नहीं पाए
बंदगी क्या है और ख़ुदा क्या है
जब अमानत है ज़िन्दगी उसकी
मौत किसकी है ये बला क्या है
हुस्न वाले ही ये बताएँगे
जुरअते-इश्क़ की सज़ा क्या है
डूबने वाले को बचा लाया
एक तिनके का हौसला क्या है
साज़िशों के भंवर डुबा बैठे
इक शनावर का डूबना क्या है तैराक
पूछते हैं वो देंगे हम रिश्वत
आइना झूठ बोलता क्या है
उनकी चाहत का है सिला ये 'कँवल'