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मोहब्बतों के सफ़र में थकान थोड़े है।

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'236
मुहब्बतों के सफ़र में थकान थोड़ी है।
तेरे बग़ैर ये मौसम जवान थोड़ी है।
ये देश प्यार का नफ़रत महान थोड़ी है।
तलाक देना ही मर्दों की शान थोड़ी है।
तुम्हारा ख़ून तो शामिल नहीं गुलिस्तां में
लुटेरों के लिए हिंदोस्तान थोड़ी है
जो अपना घर न इसे समझे, तोड़ फोड़ करे
लगाए आग जो वह मेहरबान थोड़ी है
सिखाए रहना जो मिलजुल के है वही उर्दू
बग़ैर प्यार के शीरीं ज़ुबान थोड़ी है।
लगाओ आग,चलाओ कहीं भी बम-पत्थर
'किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।'
रहो यहां पे तराना सुनाओ दु्‌श्मन के
तुम्हारी क़ौम का कुछ इस पे ध्यान थोड़ी है।
जो हम कहेंगे तुम उसका कहोगे ठीक उल्टा
तुम्हारी रूह में भारत की जान थोड़ी है।
तुम्हारी नस्ल में ही बस जवां नहीं होते
जहां हो हिंसा वो हिंदोस्तान थोड़ी है।
शिवाजी, तेग के, राणा के हम भी हैं वंशज
तुम्हारे ख़ून में ही ये उफ़ान थोड़ी है।
अमित का मोदी का संकल्प रंग लाया है
रविश, कन्हैया, ओवैसी की तान थोड़ी है
रिवाजो-रस्मे-तमद्दुन बचाए रखिए 'कँवल सांस्कृतिक परम्पराएँ
मुहब्बतों का चलन बदज़ुबान थोड़ी है।