#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'235
मुस्कराउंगा, गुनगुनाउंगा
मैं तेरा हौसला बढ़ाउंगा
रूठने की अदा निराली है
जब तू रूठेगा, मैं मनाउंगा
क़ुरबतों के चिराग़ गुल करके
फ़ासलों के दिये जलाउंगा
जुगनुओं - सा लिबास पहनूंगा
तेरी आंखों में झिलमिलाउंगा
मेहरबां होगा जब वो जाने-'कँवल’