#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'238
मेरी ग़ज़लों की है रानी जो, उसकी बात ही क्या है मुहब्बत है वो रूहानी जो, उसकी बात ही क्या हैहसीं महफ़िल सजाई है, हंसी है, क़हक़हे भी हैंवो मिस्ले-हुस्ने-दीवानी जो, उसकी बात ही क्या हैमेरे जीवन की माला में है वो एक डोर की सूरतकरे दुनिया को नूरानी जो, उसकी बात ही क्या हैमुझे जूठा यूं कर डाला है उसके इश्क़ ने लोगोनहीं मिलता हवा-पानी जो, उसकी बात ही क्या हैमुसीबत के बुरे मौसम में उसका आसरा है बसदरस दे दे महारानी जो, उसकी बात ही क्या हैकिसी राजा की शह ने मात दे दी है दरिंदों कोन जनता को परेशानी जो, उसकी बात ही क्या हैसुहानी शाम है रिमझिम फुहारें खुल के बरसी हैं'कॅंवल' आ जाए दिलजानी जो, उसकी बात ही क्या है