#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'249
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन
मैं यजमान जबसे बना हूं
पुरोहित को ही ताकता हूं
किसी और का हो गया हूं।किसी के लिए बेवफ़ा हूँ ज़ुबां आंखों की काम आईकहां लब से सब कह सका हूं
नई ड्राइविंग सीख कर मैं सड़क पर रुकावट बना हूंउसे देख कर मस्त हैं सबनुमाइश में मैं भी खड़ा हूंमेरी कमनसीबी तो देखोकिसी कम नज़र का पता हूंलिपटने को आतुर है मुझसेवो कहती है 'मैं तो लता हूं'
वो देवी है मेरी वफ़ा की
मैं श्रद्धा से नत हो खड़ा हूँ
भले दिन भी कितने भले थे