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मुद्दतों बाद तेरी याद सुहानी आई

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'233
मुद्दतों बाद तेरी याद सुहानी आयी
मुद्दतों हिज्र के दरिया में रवानी आयी
मुद्दतों मुझको सुनाता रहा क़िस्सा कोई
मुद्दतों याद मुझे अपनी कहानी आयी
मुद्दतों दूर रही कमरे की ठंडक मुझसे
मुद्दतों कमरे में वो शोख़ न मानी,आयी
मुद्दतों बीबी ने घर बार संभाले रखा
मुद्दतों मुझको न इक पाई बचाने आयी
मुद्दतों माँ ने मेरे बालों में ऊँगली फेरा
मुद्दतों बाद मुझे दर्द बयानी आयी
मुद्दतों बेटियाँ रौनक़ रहीं मेरे घर की
मुद्दतों याद बहुत उनकी निशानी आयी
मुद्दतों ज़ख्मों के लश्कर मुझे धमकाते रहे
मुद्दतों बाद मुझे खाक उड़ानी आयी
मुद्दतों वस्ल के मंज़र मुझे याद आते रहे
मुद्दतों बाद गई रुत की निशानी आयी
मुद्दतों बेटी से आबाद रहा घर मेरा
मुद्दतों बाद बहू घर में सयानी आयी
मुद्दतों मुझको लुभाता रहा लहजा तेरा
मुद्दतों बाद तेरी चिट्ठी पुरानी आयी
मुद्दतों बाद मिला ट्रेन में तुझसा कोई
मुद्दतों याद बहुत तेरी जवानी आयी
मुद्दतों खाक में मिलता रहा मेयार कँवल
‘मुद्दतों बाद मुझे बात बनानी आयी’