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मुझसे मिलता है अजनबी की तरह

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'231
मुझसे मिलता है अजनबी की तरह
मुझ में रहता है ज़िन्दगी की तरह
मेरे सज्दों में वह दमकता है
रब के अहसास-ए-बंदगी की तरह
बादशाहत थी जब अंधेरों की
साथ मेरे था चांदनी की तरह
सारे इनआम उसने लौटाए
बेअदीबों की बुज़दिली की तरह
करते इज़हार-ए-बरहमी खुलकर
जोश-ओ-ग़ालिब की शायरी की तरह
जिसका बर्ताव था अमीरों सा
रूबरू है वो मुफ़लिसी की तरह
रंग सब ले उड़ा निगाहों से
अब वो आँखों में है नमी की तरह
फूल,शबनम,बहार,सुबह,हवा
सब रंगीली हैं सादगी की तरह
हार बैठा ‘कँवल’ मैं क्या करता
वह मिला मुझसे दोस्ती की तरह
सृजन : 25 दिसंबर,2015
आकाशवाणी पटना के उर्दू प्रोग्राम महफ़िल-ए-सुखन में 25 जनवरी 2016 को प्रसारित
दैनिक भास्कर ,पटना के साहित्य दिनांक 7 मार्च 2016 को प्रकाशित
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