#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'251
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
रामभज रामभज रामभज
मौज में आज है जलपरीउस पे पहरा, नहीं है कोईमौत अपना बनाने को थीमुझको भाने लगी ज़िंदगीअनकही याद सबको रहीजो कही कब गई वह सुनीजम के बैठे रहे रंजो- ग़मजल्द चल दी, न ठहरी ख़ुशी जब समाअत पे हों बंदिशें श्रवण भाड़ में जाए वो मु़ंसिफ़ीराम मंदिर बना कर 'कॅंवल'आप ने हद सभी पार की