#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'211
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
बदला बदला सा है मेरा दफ़्तर
रूप सज्जा में है नया दफ़्तर
बायोमेट्रिक से लोग आते हैं
सीसीटीवी लगा हुआ दफ़्तर
लैपटॉपों के साथ सिस्टम भी
फ़ाइलों से हुआ जुदा दफ़्तर
फ़ाइलें पल में ढूंढ लेते हैं
जल्द निपटाता है भला दफ़्तर
आंसुओं ने लगा दिया जमघट
मेरी यादों का जब खुला दफ़्तर
मुजरिमों की न हो ज़मानत जब
जेल में खोलें ज़ुल्म का दफ़्तर
फ़ाइलें देख अहलिया ने कहा
घर 'कँवल' बन न पायेगा दफ़्तर