#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'196
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन
प्रश्न हूं मैं, हल नहीं हूं
रास्ता समतल नहीं हूं
जीन्स में जाती हूं दफ़्तर
रेशमी आंचल नहीं हूं
बंद बोतल का हूँ पानी शुद्ध गंगा जल नहीं हूंहाँ मैं हूँ मुश्किल घड़ी हाँ एक आसाँ पल नहीं हूँ
ब्लैक में मिल जाउंगी मैं
शॉप में पागल ! नहीं हूँ
अब कहाँ नज़रों में मस्ती
ज़ुल्फ़ का बादल नहीं हूँ मैं
भावनाओं में बहो मत
दिल में हूँ,हलचल नहीं हूँ
कौन बुलडोज़र से उलझे
हाथियों/योगियों का बल नहीं हूँ
कौन समझाए 'कँवल' को