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दिल का मकान ग़म ने किराये पे ले लिया

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'174
मफ़ऊलु फ़ाइलातु मफ़ाईलु फ़ाइलुन
दिल का मकान ग़म ने किराये पे ले लिया
खुशियाँ जो मुस्तक़िल थीं उन्हें बेदखल किया स्थायी
हमने बयान दर्ज़ कराया नहीं अभी
पर फ़ैसला सुनाने को बेकल है अद्लिया
स्कूल ने पढ़ाया सिखाया है पाठ वो
हर रोज़ इम्तिहान का ख़त लाये डाकिया
यारों में बांटते रहे जो भी ख़ुशी मिली
हमने कभी न बैंक में ये धन जमा किया
हक़ एक - सा सभी का है जल- वायु- भूमि पर
कैसे इसे जनाब ने नाम अपने कर लिया
है सारे हुक्मरान को रिश्वत की लत लगी
क्या- क्या न गुल खिला रहा बालू का माफिया
होंठों पे रक्स करते नहीं लफ्ज़ अब कँवल
अच्छा है अब ग़ज़ल को कहें बाई,शुक्रिया