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तेरे वस्ल की शोख़ चाहत से पहले

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'163
तेरे वस्ल की शोख़ चाहत से पहले
मैं तनहा था तेरी रिफ़ाक़त से पहले
न रंज ओ अलम था,न थी ग़म की दस्तक
बड़ा लुत्फ़ था तेरी चाहत से पहले
वफ़ा,प्यार,राहत,खुशी का ये मंज़र
न था कुछ तुम्हारी इनायत से पहले
न थी बेरुख़ी,फ़ासला भी नहीं था
अजब दिन थे तेरी रिफ़ाक़त से पहले
उदासी के दिन,बेनियाज़ी की रातें
न मुमकिन थीं, तेरी इजाज़त से पहले
बहुत सर्द बिस्तर था,कमरा था ठण्डा
तुम्हारे बदन की तमाज़त से पहले
बड़ा नर्मो-नाज़ुक है लहज़ा ‘कँवल’ का
कहे किसने शेर इस फ़साहत से पहले
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