Back to List

तेरे बिस्तर पे कोई सोता है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'162
तेरे बिस्तर पे कोई सोता है
घर तेरे ख़्वाब का डुबोता है
सब अमीरों की मय्यतों में दिखें
कब ग़रीबों को कोई ढोता है
दिल जलाने का ख़्वाब ख़्वाब रहा
वह ख़यालों में अब भी रोता है
ओढ़ कर शबनमी लिबास न चल
धूप में कोई कपड़े धोता है ?
पास दिल था ,न जब यहाँ तुम थे
जब यहाँ तुम हो,दिल न होता है
मैं भी उसका कहाँ हुआ ? वह भी
साथ रह कर मेरा न होता है
धूप बत्ती सा पारा पारा जल
ख़ुशबुओं से किसे भिगोता है
सृजन : 22 फ़रवरी, 2017
(48)