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तुम्हारी यादों का सिलसिला हो

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'158
फ़ऊलु फ़ैलुन फ़ऊलु फ़ैलुन
या
मफ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़‌ऊलुन
तुम्हारी यादों का सिलसिला हो
उदास कमरा भी हँस रहा हो
बुझे से चेहरों से मिल के क्या हो
ख़ुशी जो अपनी है वो फ़ना हो
सुलूक था अजनबी-सा उसका
लगा नहीं वो कभी मिला हो
बुरे हैं दिन तो निराश हो मत
दुआएं कर आगे दिन भला हो
कहाँ मुंडेरों पे काग बोले
चला कोई कैसे ये पता हो
चुनाव में जो फ़िज़ा बनी है
न जाने होली से पहले क्या हो
'कँवल' मुबाइल पे व्यस्त हैं सब
घरों में हैं सब अलाहिदा हो