#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'154
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन
तुमसे मिलने का इरादा
है बहुत प्यारा इरादा
कुछ न होगा सोचने से
जब नहीं करना इरादा
फूलों को रखना सुरक्षित
है ये काँटों का इरादा
आपके दिल को दुखाना
था कहाँ मेरा इरादा
मुफलिसों के मन में भी है
घर बनाने का इरादा
राम मंदिर बन गया है
अब है मथुरा का इरादा
है कँवल दिल्ली का अब तो
सेंट्रल विस्टा इरादा