Back to List

तुझे मैं ख्वाबों का अलबम दिखा नहीं पाया - Copy

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'153
तुझे मैं ख्वाबों का अलबम दिखा नहीं पाया
कि हर वरक़1 मे झलकती थी खौफ़ की काया
कभी तो आ के तू यादों की डायरी पढ़ ले
बिछड़ के तुझ से न अब तक मुझे क़रार आया
यूं तैरते रहे फैले ग़मों के सन्नाटे
कि लज़्ज़तों की सदाओं को बेअसर पाया
निगल गये हमें कुछ ऐेसे, साअतो2 के भंवर
कि मै ही उभरा, न तू ही कभी नज़र आया
हसीं छलावा था यौवन की धूप कुर्ब3 का लम्स4 ढ़ला जो उम्र का सूरज तो उसको होश आया
नये लिबास पहन कर ये बे-लिबास शजर5
बहुत ही खुश हैं कि गुज़रा हुआ शबाब आया
तुम्हारे होटों पे अमृत के थे कलश लेकिन
वेा मैं ही था जो ज़माने से डर के भाग आया