#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'147
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
डिजिटल करे पढ़ाई ग़म
बोलें सभी बधाई ग़म
खुशियों के मौसम में भी
काटे बहुत मलाई ग़म
जार जार रोये मन जब
बेटी करे बिदाई ग़म
आहिस्ता से आ पहुंचे
देता नहीं दिखाई ग़म
खुशियों से महरूम करे
कर लेवे जो सगाई ग़म
कितना भी नासाज़ रहूँ
माँ कर दे तुरपाई ग़म
ग़म को चाहे कौन 'कँवल'
कर ले भले बड़ाई ग़म