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जामुन की शाख़ पर क भी झूला न डालिए

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'119
मफ़ऊलु फ़ाइलातु मफ़ाईलु फ़ाइलुन
जामुन की शाख़ पर कभी झूला न डालिए
उस महजबीं के प्यार को दिल से निकालिए
तक़रीरे-इन्तख़ाब हक़ीक़त से दूर हैं चुनावी भाषण
इन लीडरों के वादों को हँस कर ही टालिये
सूरज की लालिमा में अँधेरों का ख़ौफ़ है
सुहबत से इनकी जल्द ही ख़ुद को निकालिये
ख़ुश फ़िक्र वादियों से गुज़रने के बाद ही
इन क़ाफ़ियों को ग़ज़लों के सांचे में ढालिए
तलवार की बिसात से बदली है रुत कहाँ
फ़रमान से ये फल तो दरख़्तों पे आ लिए
सौदा कभी करें न फ़ज़ीलत का दोस्तो श्रेष्ठता /बड़प्पन
चूल्हे पे सब्रो-ग़म के फ़ज़ीहत उबालिए अपयश/अपमान
हरगिज़ बुरे दिनों से न घबराइए ‘कँवल’
ज़ेवर ज़मीर का किसी सूरत संभालिये