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जि़ंदगी इन दिनों उदास कहॉ

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'139
जि़ंदगी इन दिनों उदास कहॉ
तुझसे मिलने की दिल में आस कहॉ
मौसमों में गुलों की बास कहॉ
मुफ़्लिसी मेरी ख़ुशलिबास कहॉ
लान से फूल पत्तियां ओझल
तेरी यादों की नर्म घास कहॉ
रतजगा फूल तारे चांद हवा
नींद बिस्तर के आस पास कहां
मंदिरों में निराश उम्मीदें
देवियां फिर भी हैं उदास कहां
ताज़गी अब कहां तेरे लब पर
मेरी आंखों में कोई प्यास कहां
ख़ुशबुओं का पता तो आसां है