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जलसों में झूठा बोले

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'118
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
जलसों में झूठा बोले
सच होकर बेबस रो ले
रूठ गयी क़ौमी मिल्लत
भाषा कैसी ये बोले
पहली बार न रोका तो
ज़ुल्मी हरदम मुंह खोले
इश्क़ बहुत करता है शोर
हुस्न इशारे से बोले
ग़म का पलड़ा भारी है
कौन ख़ुशी को अब तोले
झूठ की गश्ती कर्फ्यू में
कौन दुकां सच की खोले
तोह्फ़ो की रिश्वत दूंगा
आ मेरे संग तू हो ले
जंगल में मुस्कानों के
अपनेपन के हैं टोले
काशी के गंगाजल में