#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'115
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ा
जब से वो बाज़ार गया
ख़्वाहिश का बाज़ार सजा
चलते हैं तफ़रीह को हम
लो अब शोपिंग माल खुला
अपनी ज़रुरत हमसे अधिक
टीवी विज्ञापन को पता
भाषा पढ़ इमोजी की
लिखने की ज़हमत न उठा
फूल के दिन मसरूफ़ बहुत
रात में लें खिलने का मज़ा
दिल की सब बातें कह दीं
बेअदबी का अलग मज़ा
'मीराबाई चानू' ख़ुश
सिल्वर मैडल 'कँवल' मिला