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जब से इस दिल को भा गयी मिटटी -

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'114
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
जब से इस दिल को भा गयी मिटटी
आसमाँ को लुभा गयी मिटटी
उड़ते रहते हैं अन्तरिक्ष में जो
उनको मंज़िल दिखा गयी मिटटी
हीरा मोती भी सोना चांदी भी
देख मेहनत उगा गयी मिटटी
पेश कर हाल सूखे दरके हुए
बारिशों को लुभा गयी मिटटी
लग गयी आग जब गगनचुम्बी
जलमहल में बुझा गयी मिटटी
ज़िन्दगी को सँवारने के लिए
चाक पर लड़खड़ा गयी मिटटी
ऐशो - आराम धूल उड़ाते रहे
दिल 'कँवल' को थमा गयी मिटटी
रमेश 'कँवल'
2 अक्टूबर,2022