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चाँद हुआ है रिश्तेदार

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'103
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ाअ /फ़े
चाँद हुआ जब रिश्तेदार
तारे भी करते हैं प्यार
छत पे जाग के करते हैं
दोनों मिलने का इसरार
उसके मान मनव्वल पर
कब तक रहता मैं ख़ुद्दार
उनकी रिफ़ाक़त उफ़ तौबा
कर के कौल करें इनकार
झूठे वादे कर तुमने
मेरी उम्र बढ़ा दी यार
राधा- कृष्ण नज़र में हैं
गागर छलकाए पनिहार
हिज्र में ज़िन्दा रहना यूँ
बिन पेट्रोल के जैसे कार
कितने दिन छत इठलाये
दीवारों में देख दरार गुल रहते हैं मस्त कँवल