#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'093
मफ़ऊलु मफ़ाईलु मफ़ाईलु फ़उलुन
गर्दिश से निकल आया है किस्मत का सितारा
अब झूमेगा हर सिम्त सखावत का सितारा
ख़ुशबू के नगर में है मुहब्बत का सितारा
लो टूट गया ज़ुल्म की दहशत का सितारा
हर चीज़ मयस्सर थी मेरे बाज़ू के दम पर
मैं ढूंढता फिरता रहा क़िस्मत का सितारा
बाज़ू में मेरे साथ रहा चाँद सा मुखड़ा
मैं शहर में गिनता रहा उल्फ़त का सितारा
पाबंदी लगाईं गई तंज़ीम पे जिस दम
बस दफ्न हुआ उनकी बग़ावत का सितारा
हासिल हुई दरवेश की नज़रों की इनायत
आकाश पे चमका मेरी शुहरत का सितारा
सब झोलियाँ भरने मे थे मसरूफ़ 'कँवल' जब
रोशन था जहाँ में मेरी दौलत का सितारा