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खूबसूरत लगा चांद कल

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'084
ख़ूबसूरत लगा चांद कल
मैंने उसको सुनाई ग़ज़ल
ख़्वाब की झील में ले गई
ख़ूबसूरत सी उसकी पहल
शहर में फिर धमाका हुआ
गांव कस्बे गये फिर दहल
ख़ूबसूरत खिलौनों को छू
सारे बच्चे गये कल मचल
डायबेटिज़ का मत साथ दे
तू सवेरे - सवेरे टहल
सादगी ने किया बेज़ुबां
क्या बयां आपका है 'कंवल’