#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'076
कैसी बंदिश है कोई भी पसे-मंज़र न लिखे पृष्ठभूमि
बात जो सच हो उसे कोई सुख़नवर न लिखे शायर, लेखक
क़ौम कोई हो किसी को कोई बरतर न लिखे श्रेष्ठ
हाँ मगर जो भी है आला उसे कमतर न लिखे उत्तम
राम मंदिर वो बना लेंगें नहीं शक इसमें
राम वंशज को कोई अपने बराबर न लिखे
जो गुनहगार है इतिहास का लाज़िम है उसे
शाह अकबर को तो अब राणा से बेहतर न लिखे
कितने राजाओं ने मुग़लों से किये राज उमदा
उनकी मिदहत में किसी ने कभी जौहर न लिखे प्रशंसा
हमसफ़र जो न रहे उसका सफ़र ख़त्म करो
अब सियासत में कोई राह का पत्थर न लिखे
जो जिहादी है उसे अपने ही भाते हैं मगर
क्या 'कँवल' उसको कोई अपने बराबर न लिखे?
रमेश 'कँवल'
14 अक्टूबर,2021
महानवमी