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उसकी सारी ख़ूबियाँ ख़ुद जलवागर करता रहा

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'050
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
उसकी सारी ख़ूबियाँ ख़ुद जलवागर करता रहा
उसके ख़्वाबों से मैं नींदें तरबतर करता रहा
हो गया एहसास जब बाक़ी रहा कुछ भी नहीं
दस्तख़त पर दस्तख़त मैं बेहुनर करता रहा
लमहा लमहा वो झलकता ही रहा स्क्रीन पर
मैं भी मोबाइल से उसको दरबदर करता रहा
ख़त मुसलसल उसको लिखने की मेरी आदत रही
दिल के डेटाबेस में वह उनको घर करता रहा
ख़्वाहिशों की किरचियां आँखों में चुभती थीं ‘कँवल’
ज़िक्र हाये दर्दे-उल्फ़त हमसफ़र करता रहा