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उनसे मिल कर भाव विह्वल हो गए

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'045
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
उनसे मिल कर भाव विह्वल हो गए
सब विरह के दाग़ ओझल हो गए
सादगी में प्यार की थी ताज़गी
गुफ़्तगू से उनकी क़ायल हो गए
गालों की लाली गुलाबी लब पे हम
सुरमई आँखों के काजल हो गए
मेरी ख़ुशियों के नगर थे अर्श पर
उनसे मिल कर ग़म रसातल हो गए
क़ातिलों में जब थे शामिल अपने जन
हो के बेबस हम भी घायल हो गए
हम पे अमृत काल की मस्ती चढ़ी
हम तरक्क़ी के हिमाचल हो गए
योगी बुलडोज़र चला ऐसा 'कँवल'
मुजरिमों के घर धरातल हो गए