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ईश्वर अंश भला इंसान

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'043
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ाअ
ईश्वर अंश भला इंसान
कितना बदल गया इंसान
जंगल जल जीवन सबको
नुक़सां पहुंचाता इंसान
लूट के अपनी धरती को
चाँद पे जा पहुंचा इंसान
पर्वत नदियों झरनों को
वश में है करता इंसान
भटकाए कल तक था जो
दिखलाता रस्ता इंसान
सुख आराम से रहने को
कष्ट कई सहता इंसान
वन्दे भारत ट्रेन 'कँवल'
देश में अब चढ़ता इंसान