#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'021
आँखों से इस्कैन किया
कातिल चेहरा बैन किया
खौफ़ की इक कालीन बिछा
दुश्मन को बेचैन किया
भक्त बना शिव का मैं भी
घर अपना उज्जैन किया
सपने सब रंगीन हुए
श्रम मैंने दिन - रैन किया
हरियाली पर धूप बिछा
जंगल मन बेचैन किया
मेरी ग़ज़ल की ख़ुशबू ने
सबको अपना फ़ैन किया
कौन 'कँवल' को समझाए
क्या उस शोख ने बैन किया बात
14 अक्टूबर,2021