#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'028
‘आदमी बुलबुला है पानी का’
हौसला नाम है जवानी का
ज़िद पे दफ़्तर है बदगुमानी का
हो भला उनकी हुक्मरानी का
मोतियों सा बिखरना क़िस्तों में
फ़र्श पर अर्श की कहानी का
मौत तरसाती रहती है उसको
जिसको शिकवा है ज़िन्दगानी का
रोजो-शब माहो-साल से गुम है
तज़्किरा इश्क़ की कहानी का
ख़ुद को खोकर तुझे न पाऊंगा
है ख़बर इस सराये -फ़ानी का
‘डेट’ पर उनसे मिल के यह जाना
मोल है उनकी शादमानी का
न ख़ुशी है न रंजो-दर्द ‘कँवल’
फ़ानी दुनिया की पासबानी का
सृजन : 18 अप्रैल 2017
प्रसारण : दूरदर्शन पटना से साहित्यिकी में 26 जून 2017 को प्रसारित