#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'026
दूर करिए अधूरापन मेरा
आज भर दीजिये ये मन मेरा
उसकी खुशबू थी,घर,चमन मेरा
रूह उसकी, लिबास, तन मेरा
मेरे कांधे पे थी थकन उसकी
उसकी नज़रों में बांकपन मेरा
आबे जमजम था उसकी आंखों में
शुद्ध मन से था आचमन मेरा
चांदनी को सफ़ेद टब भाया
पेश ‘श्री देवी’ को नमन मेरा
साफ़ से साफ़ उजला टब था मैं
उसने चूमा धवल वसन मेरा
लोभ लालच ‘कँवल’ को ले डूबा
वरना होता न आगमन मेरा
सृजन 27 फ़रवरी 2018
हिंदी ग़ज़ल का बदलता मिजाज़ ; पृष्ठ 95