#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'024 मफ़ऊल मफ़ाईलुन मफ़ऊल मफ़ाईलुन 2 2 1 1 2 2 2 2 2 1 1 2 2 2 आगाज़ मुबाइल है अंजाम मुबाइल हैइंसान के हाथों में सुखधाम मुबाइल हैहर शख्स की नज़रों में गुलफ़ाम मुबाइल हैग़म हो कि मसर्रत हो इक जाम मुबाइल हैललचाई निगाहों से क्यों देखें नहीं इसकोजादू का ये डिब्बा है पर नाम मुबाइल हैडिस्पैच करे कोई जब वीडियो कुछ बेजाकरता है कोई लेकिन बदनाम मुबाइल हैअपनों को पलों में ये इस्क्रीन पे है लाताबिछड़ों को अदा करता आराम मुबाइल हैमैदान हो खेलों का धरना कि प्रदर्शन होहो जंग कि पूजा हो हर गाम मुबाइल हैखोए हुए रहते हैं इस तरह सभी इसमेंजैसे कि ये ईश्वर हो हर याम मुबाइल हैये पाँच जी का टाइम आरंभ हुआ मित्रो हाथों में लिया सबने अब थाम मुबाइल है
उज्जैन, अवध, मथुरा, काशी हो कि संगम हो
बजता है 'कँवल' अब तो हर धाम मोबाइल है