जनवरी 2, 2020

ज़रा ज़रा सी बात पर वो मुझ से बद-गुमाँ रहे जो रात दिन थे मेहरबाँ वो अब न मेहरबाँ रहे जुदाइयों की लज़्ज़तों की वुसअतें नहीं रहीं वो ख़ुश-ख़याल वस्ल बन के मेरे दरमियाँ रहे पहेलियाँ बुझाओ मत बहाने अब बनाओ मत यहीं कहीं नहीं थे तुम बताओ फिर कहाँ रहे वो मेरे साथ कब…