#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’60
वफ़ा के गीत मैं गाता रहूँगा
तुम्हारे ज़ह्न पर छाता रहूँगा
हमेशा रह के तेरी दस्तरस में
'मैं तुझसे इश्क़ फ़रमाता रहूंगा'
बहारों के हसीं सपने दिखाकर
तुम्हारे दिल को बहलाता रहूँगा
अगर पूछे कोई अपना मरासिम
कहूँगा क्या मैं शरमाता रहूँगा
नज़र रक्खूँगा ए आई से तुम पर
मुसीबत में भी काम आता रहूँगा
करेगा जी हुज़ूरी कोई रोबट
तुम्हें इस तरह बहलाता रहूँगा
'कँवल' आएंगे अच्छे दिन हमारे
ये कह दिलबर को फुसलाता रहूँगा
सृजन : 9 जून, 2025
मफ़ाइलुन मफ़ाइलुन फ़ऊलुन
फ़ेसबुक पर 13 जून,2025 को पोस्टेड
दो बातें में 14 जून,2025 को प्रकाशित