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मुस्कुराने का हुनर हर दिल को आना चाहिए- रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’53
मुस्कुराने का हुनर हर दिल को आना चाहिए
बेबसी की धूप में भी मुस्कुराना चाहिए
कोई भी मौसम हो दिल में हौसला कुछ कम न हो
मुश्किलों की रेत से पानी बहाना चाहिए
वस्ल के दफ़्तर में रौनक़ हुस्न की है पुरअसर
हिज्र के तूफ़ान को हरगिज़ न आना चाहिए
पैरहन में जिस्म के उरियानी की लक धक बहुत
अब मुहज़्ज़ब परवरिश को कुछ सिखाना चाहिए
जंग में बारूद बम गोले से थर्राये ज़मीं
रहबरो अब जंग को दिल से मिटाना चाहिए
मुंसिफ़ों को लग गई रिश्वत की लत अब क्या कहें
हमको ये स्तम्भ गिरने से बचाना चाहिए
जब 'कँवल' वो याद ही करते नहीं हैं प्यार से
आपको भी उनको खुश हो भूल जाना चाहिए
सृजन - 23 जून, 2025
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